Mutual Fund Overlap : म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय कई बार निवेशक फंड ओवरलैप की समस्या को जाने बिना म्यूचुअल फंड में निवेश कर देते हैं जिस वजह से उन्हें भविष्य में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

Mutual Fund Overlap : वैसे तो म्यूचुअल फंड में निवेश करना सही होता है और इसमें निवेश करने के कई फायदे भी हैं जिनके बारे में इसमें निवेश कर रहे सभी निवेशकों को पता होता है। लेकिन म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले कुछ ही निवेशक ऐसे होंगे जिन्हें फंड ओवरलैप जैसी गंभीर समस्या के बारे में पता होगा।
यह ऐसी समस्या है जिसके बारे में म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे सभी निवेशकों को जानकारी जरूर होनी चाहिए क्योंकि यह सही मायने में ध्यान देने वाली बात है ताकि भविष्य में इससे होने वाले नुकसान को वह काफी हद तक कम कर सकें।
आज इस आर्टिकल में हम आपको इसी फंड ओवरलैप की समस्या के बारे में जानकारी देने की कोशिश करेंगे जैसे म्यूचुअल फंड ओवरलैप क्या होता है और क्यों निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय इस पर ध्यान देना चाहिए? आइए जानते हैं-
क्या होता है म्यूचुअल फंड ओवरलैप?
म्यूचुअल फंड ओवरलैप एक ऐसी समस्या है जो तब उत्पन्न होता है जब किसी निवेशक के पोर्टफोलियो में दो या दो से अधिक म्यूचुअल फंड स्कीम्स हों तथा उन स्कीम्स ने एक जैसे स्टॉक्स में ही निवेश कर रखा हो।
उदाहरण के लिए अगर किसी निवेशक ने दो लार्जकैप इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (Equity Mutual Funds) में निवेश किया है तो इस बात की पूरी संभावना है कि उन दोनों म्यूचुअल फंड स्कीम्स ने रिलायंस, टीसीएस या इन दोनों के जैसे ही अन्य किसी ब्ल्यू चिप स्टॉक्स में निवेश किया हो।
इसे ही म्यूचुअल फंड ओवरलैप कहते हैं और इसके चिंता का विषय होने के पीछे कारण यह है कि एक ही तरह के स्टॉक्स में निवेश करने से पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन कम हो जाता है जिससे पोर्टफोलियो पर रिस्क बढ़ जाता है।
इन वजहों से म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय इस पर देना चाहिए ध्यान!
म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय निवेशकों को फंड ओवरलैप पर जरूर ध्यान देना चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें नीचे बताए गए समस्याओं का सामना न करना पड़े। ये रहे वो सभी समस्याएं जिनका सामना एक निवेशक को फंड ओवरलैप की स्थिति में करना पड़ सकता है-
1. डाइवर्सिफिकेशन को करता है कम
म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सबसे जरूरी यह होना चाहिए कि उनका पोर्टफोलियो डाइवर्सिफाइड हो जिससे भविष्य में उनके पोर्टफोलियो पर रिस्क कम हो सके। लेकिन फंड ओवरलैप हो जाने के कारण एक तरह के स्टॉक्स में निवेश हो जाता है जिससे पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन नहीं रह जाता और उस पर रिस्क भी बढ़ जाता है।
2. बढ़ जाता है नुकसान होने का खतरा
म्यूचुअल फंड में ओवरलैप हो जाने के कारण निवेशकों के पैसे का निवेश एक ही तरह के स्टॉक्स में हो जाता है जिस वजह से बाजार की गिरावट में नुकसान होने तथा उस नुकसान के बढ़ जाने का खतरा बढ़ जाता है।
3. इनएफिशिएंट हो जाता है पोर्टफोलियो
फंड ओवरलैप हो जाने की स्थिति में पोर्टफोलियो के एफिशिएंसी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है जिस वजह से निवेशकों को अपने निवेश पर मनचाहा रिस्क तथा रिटर्न का संतुलन नहीं मिल पाता।
4. पोर्टफोलियो मॉनिटर करने में होती है दिक्कत
फंड ओवरलैप हो जाने से एक ही तरह के स्टॉक्स में निवेश हो जाता है जिससे निवेशकों को किसी खास सेक्टर या स्टॉक्स में सही निवेश का आंकलन करने में दिक्कत आती है तथा उन्हें अपने पोर्टफोलियो को मॉनिटर करने में भी परेशानी होती है।
उम्मीद है म्यूचुअल फंड से जुड़ी यह एक और जानकारी आपको काफी पसंद आई होगी और इससे भविष्य में आप एक समझदार तथा जानकार निवेशक बन पाएंगे और म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि के लिए एक बेहतर म्यूचुअल फंड चुनकर उसमें बेहतर तरीके से निवेश कर पाएंगे।
डिस्क्लेमर : यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है तथा यह किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह नहीं देता। इस आर्टिकल के माध्यम से फाइनेंशियल वर्ल्ड ऑनलाइन वेबसाईट आपको किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह नहीं देता। फाइनेंशियल वर्ल्ड ऑनलाइन वेबसाईट आपको किसी भी तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श लेने की सलाह देता है। म्यूचुअल फंड में किसी भी तरह के नुकसान के लिए फाइनेंशियल वर्ल्ड ऑनलाइन वेबसाईट या इसके लेखक किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होंगे।