Gold Mutual Funds Tax : वैसे तो गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने के अपने फायदे होते हैं तथा इनमें सुरक्षित रिटर्न्स मिलने की भी संभावना बनी रहती है लेकिन इन रिटर्न्स पर भी अलग-अलग तरीके से टैक्स लगता है जिसके बारे में इन म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले हर निवेशक को जानकारी होनी चाहिए।

Gold Mutual Funds Tax : अपने पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करने तथा उसे बाजार के जोखिमों से बचाने के लिए अलग-अलग जगह निवेश करना एक समझदारी भरा निर्णय होता है तथा इसके लिए गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में निवेश करना सबसे बढ़िया निवेश विकल्पों में से एक है।
यह न सिर्फ निवेशक के पोर्टफोलियो को बाजार के जोखिमों से बचाता है बल्कि अन्य एसेट क्लास जब बेहतर तरीके से परफॉर्म नहीं कर रहे होते तब यह बढ़िया रिटर्न देकर उनके पोर्टफोलियो का संतुलन भी बनाए रखता है।
गोल्ड म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने से निवेशकों को सुरक्षित रिटर्न्स मिलने की संभावना तो बनी ही रहती है लेकिन इन रिटर्न्स पर भी टैक्स लगता है जिसके बारे में इन म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने वाले हर एक निवेशक को जरूर पता होना चाहिए ताकि उन्हें इस वजह से कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े।
आज हम आपको इस आर्टिकल के माध्यम से गोल्ड म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाले रिटर्न पर लगने वाले टैक्स के बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश करेंगे। आइए जानते हैं-
इस तरह से गोल्ड म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाले रिटर्न पर लगता है टैक्स!
बात करें गोल्ड म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाले रिटर्न पर लगने वाले टैक्स के बारे में तो जिस तरह से भारत में सोने के आभूषणों पर टैक्स लगता है ठीक उसी तरह से गोल्ड म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाले रिटर्न पर भी टैक्स लगता है। इतना ही नहीं इन म्यूचुअल फंड्स में कितने समय के लिए निवेश किया जा रहा है इस आधार पर भी इससे मिलने वाले रिटर्न पर टैक्स लगाया जाता है।
अगर निवेश तथा रिडेंप्शन की तारीख तीन साल से कम है तो इसे शॉर्ट-टर्म इन्वेस्टमेंट की कैटेगरी में शामिल किया जाएगा और इस मामले में टैक्स को कैलकुलेट करने के लिए रेवेन्यू को निवेशक के ग्रॉस इनकम में जोड़ दिया जाएगा।
लेकिन अगर निवेश की अवधि तीन साल से अधिक है तो इसके रिटर्न को लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट की कैटेगरी में रखा जाएगा और इससे मिलने वाले रिटर्न पर इंडेक्सेशन के मानदंडों के साथ 20% तक का टैक्स लगाया जाएगा। इसके अलावा निवेशकों को अन्य लागू टैक्स के अलावा सेस भी देना पड़ सकता है।
ध्यान देने वाली एक बात और यह है कि गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) में लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट से होने वाले किसी भी तरह के कैपिटल गेन पर टैक्स का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा भारत का आयकर विभाग गोल्ड म्यूचुअल फंड्स की मैच्योरिटी अथवा ट्रेडिंग के समय टीडीएस में कटौती नहीं करता है।
उम्मीद है गोल्ड म्यूचुअल फंड से जुड़ी यह एक और जानकारी आपको काफी पसंद आई होगी और इससे भविष्य में आप एक समझदार तथा जानकार निवेशक बन पाएंगे और गोल्ड म्यूचुअल फंड में लंबी अवधि के लिए एक बेहतर गोल्ड म्यूचुअल फंड चुनकर उसमें बेहतर तरीके से निवेश कर पाएंगे।
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डिस्क्लेमर : यह आर्टिकल केवल जानकारी के लिए है तथा यह किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह नहीं देता। इस आर्टिकल के माध्यम से फाइनेंशियल वर्ल्ड ऑनलाइन वेबसाईट आपको किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सलाह नहीं देता। फाइनेंशियल वर्ल्ड ऑनलाइन वेबसाईट आपको किसी भी तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से परामर्श लेने की सलाह देता है। म्यूचुअल फंड में किसी भी तरह के नुकसान के लिए फाइनेंशियल वर्ल्ड ऑनलाइन वेबसाईट या इसके लेखक किसी भी तरह से जिम्मेदार नहीं होंगे।